झांसी की रानी की कर्मस्थली बिठूर में जयंती पर पसरा रहा सन्नाटा

बुंदेलों हरबोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी..। सुभद्रा कुमारी चौहान की इन पंक्तियों और रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से शायद ही कोई देशवासी अनभिज्ञ होगा। देश की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति देने वाली झांसी वाली रानी की कर्मस्थली बिठूर शनिवार को मायूस दिखा।

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