कानपुर में हजरत मखदूम शाह आला के उर्स पर उमड़ेंगे अकीदतमंद

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कानपुर में हजरत मखदूम शाह आला के उर्स पर उमड़ेंगे अकीदतमंद

हजरत मखदूम शाह आला का 759 वां उर्स गुरुवार से शुरू हो रहा है। शुक्रवार सुबह 11 बजे कुलशरीफ होगा। इसमें आने वाले अकीदतमंदों के लिए दरगाह के सज्जादानशीन ने शुक्रवार को विशेष बसें चलाने का आग्रह किया है। उधर, मदरसा अशरफिया गदियाना में इस सिलसिले में जलसा हुआ जिसमें हजरत मखदूम शाम आला की शख्सियत के बारे में बयान किया गया। दरगाह के सज्जादानशीन अदनान राफे ने बताया कि गुरुवार को बाद नमाज ईशां (रात 08:00 बजे) महफिले समां होगी। शुक्रवार सुबह फजिर की नमाज के बाद कुरआनख्वानी होगी। फिर नात व मनकबत के बाद महफिले समां होगी। उलमा-ए-कराम की तकरीरें होंगी। इसके बाद कुलशरीफ होगा। आखिर में दुआ होगी। इस मौके पर पूरे शहर और बाहर से बड़ी तादाद में अकीदतमंद शिरकत के लिए आते हैं इसलिए प्रशासन से सुरक्षा, पानी की व्यवस्था और विशेष बसें चलाने का आग्रह किया गया है। शख्सियत हजरत मखदूम शाह आला : मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी ने मदरसा अशरफुल मदारिस गदियाना में जलसे को खिताब करते हुए हजरत मखदूम शाह आला की शख्सियत का बयान किया। हजरत मखदूम शाह आला का जन्म 21 रमजानुल मुबारक 570 हिजरी (1175 ई) को इरान के शहर जंजान में हुआ। आपने कुरान, हदीस, फिकह, अदब, इतिहास आदि सीखा। फिर दिल्ली का सफर तय किया। उस वक्त के बादशाह सुल्तान ऐबक ने आपका गर्मजोशी से स्वागत किया। फिर हजरत जाजमऊ तशरीफ लाए। हजरत मखदूम शाह आला ने अपनी 60 साला जिंदगी जाजमऊ गुजारी। 27 सफर को आपका इंतकाल हो गया। मौलाना हाशिम ने कहा कि हजरत मखदूम शाह आला का मजार जाजमऊ में है जो आस्था का केन्द्र है। यहां हर धर्म और जाति के लोग आते हैं और उनके मन्नतें मुरादें पूरी होती हैं।

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