ऐसे होती है हजारों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब करने की साजिश

votersनोएडा. लोकतंत्र में वोट डालने के अधिकार छीन लेने पर क्या सजा दी जानी चाहिए? ये बड़ा सवाल पैदा हो गया है। क्योंकि वोटों को प्रभावित करना या रोकना एक संगीन अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन यूपी में पहले चरण का मतदान होने से पहले हजारों लोगों के नाम गायब कर दिए गए। ये खुला आरोप इसलिए है क्योंकि ये नाम उन लोगों के गायब हुए हैं जो पिछले कई चुनावों से वोट डालते हुए आ रहे हैं। जी हां, नोएडा समेत वेस्ट यूपी के सभी जिलों में इस तरह की स्थिति देखने को मिली। नोएडा सेक्टर-22 में आम वोटर्स ने सेक्टर मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारियों का घेराव तक किया। यही हालात सर्फाबाद, सेक्टर-52, गिझोढ़ और अन्य जगहों पर देखने को मिले। अब सवाल ये है कि इस अजीम गुनाह के लिए क्या सजा दी जाए? किसे सजा दी जाए? अगर ये साजिश है तो क्या चुनाव आयोग इसका कभी पर्दाफाश कर पाएगा?

Noida

पिछले एक साल से चल रही थी तैयारी

पिछले एक साल से वोटर लिस्ट का वेरीफिकेशन का काम चल रहा था। कई बार नए वोटर कार्ड बनाने के लिए कैंप लगाए गए। इसके लिए अधिकतर टीचर्स और सरकारी अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई। सरकारी स्कूलों के आंकड़ों पर गौर किया जएगा तो साल में करीब 160 दिन ही स्कूल चल पाया है। इंटर कॉलेजों में एज्जाम होने वाले हैं। लेकिन अभी तक सिलेबस तक पूरा नहीं हो सका है। ये सब काम वोटर लिस्ट लिस्ट के वेरिफिकेशन के चक्कर में लटक गया है। लास्ट टाइम वोटर लिस्ट ही धोखा दे गई। क्या कोई अधिकारी इस बात का जवाब दे सकता है कि चुनावों की तैयारी ऐसे होती है या फिर कोई दूसरा भी तरीका है?

अब क्या हो सजा?

निर्वाचन आयोग ने चुनावों के दौरान होने वाली गड़बड़ी के लिए सजा तय की हुई है। चाहे आचार संहिता उल्लंघन हो या कोई और बात। कहीं पर भी इस बात का जिक्र नहीं किया गया है कि वोटर लिस्ट में नाम गायब होने पर किसे और क्या सजा दी जानी चाहिए।

साजिश के तहत काटे जाते हैं नाम

वोटर लिस्ट से नाम यूं ही नहीं गायब होते हैं? इसकी कड़वी हकीकत ये है कि डेमोक्रेसी को हाईजैक करने की ये कवायद चुनाव से काफी पहले शुरू हो जाती है? संभावित उम्मीदवारों की निर्वाचन कार्यालयों में घुसपैठ और वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ हर साल अनदेखी, अनसुनी रह जाती है।

ऐसे काटे जाते हैं वोट

नए वोट बनाने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल होता है। इससे वोटर का नाम लिस्ट में शामिल होता है। अब लिस्ट से नाम हटने या कटने का तरीका समझे। अगर पता बदला है तो दूूसरी जगह वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 है। किसी की मृत्यु की सूरत में फॉर्म-7 का ही इस्तेमाल किया जाता है। इससे मतदाता की सूचना की मृत्यु की सूचना पर उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाता है।

इस तरह से होती है साजिश

चुनाव की तैयारी असल में नई वोटर लिस्ट बनने व उसके पुनरीक्षण के साथ शुरू होती है। सियासत के शातिर खिलाड़ी यहीं वोटर लिस्ट में सेंध लगाते हैं। ये सेंध इस बात को ध्यान में रखकर लगाई जाती है कि उम्मीदवार किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहा है। इसके लिए अपने ज्यादा से ज्यादा वोट बनवाए जाते हैं। 2012 के चुनावों में एक ही पते पर 600 वोटर के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया था। दूसरा दावा होता है कि संभावित प्रत्याशी या पार्टी के परंपरागत वोटर के नाम गायब कराना। इसके लिए फर्जी तरीके से थोक के भाव फॉर्म-7 लगाकर उनके वोट ऐसे पते पर ट्रांसफर कर दिए जाते हैं कि ताउम्र तलाश नहीं सकते हैं। वैसे अधिकतर मामलों में वोटर लिस्ट से कट गया है या ट्रांसफर हो गया है।

पब्लिक की है गलती

इस बारे में जब गौतमबुद्धनगर के जिला अधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी एनपी सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आम लोगों को दो महीने पहले से इस बात की जानकारी दी जा रही है कि अगर किसी का वोट बनने से छूट गया है तो वो अपने इलाके बीएलओ से जाकर मिल सकते हैं। लेकिन उस दौरान कोई नहीं गया। पुनरीक्षण के दौरान सभी वोट बनाए जा रहे थे। कुछ लोगों ने लापरवाही दिखाकर अपना वोट के बारे में जानकारी हासिल नहीं की। प्रशासन की ओर से कोई ढिलाई नही बरती गई है।

 

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