1st फेज-73 सीटें:प्रचार का थमा शोर, अब बोलेगा मतदाता

17वीं विधानसभा के गठन के लिए 11 फरवरी को होने वाले प्रथम चरण के मतदान वाले क्षेत्रों में चुनाव प्रचार का शोरगुल बृहस्पतिवार शाम थम गया। गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ समेत पश्चिमी उप्र के 15 जिलों के 73 विधानसभा क्षेत्रों में शनिवार को वोट डाले जाएंगे। कुल 839 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

पहले चरण में कुल 1113 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। सबसे अधिक 26 प्रत्याशी आगरा दक्षिण से व हस्तिनापुर (अजा), लोनी और इग्लास (अजा) सीटों पर सबसे कम छह- छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इस चरण में मुजफ्फरनगर, शामली, अलीगढ़, मथुरा, बुलंदशहर और आगरा जैसे संवेदनशील जिले शामिल हैं। केंद्रीय बलों की 826 कंपनियां तैनात की जाएंगी।

गौतमबुद्ध नगर में तीन विधानसभा

नोएडा, दादरी व जेवर हैं। नोएडा सीट पर 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। दादरी में भी 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जेवर में आठ उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के साथ ही आक्रामक प्रचार किया।

वहीं, चुनाव प्रचार समाप्त होते ही उड़न दस्ता सक्रिय हो गए हैं। प्रत्याशियों व उनके प्रचार वाहनों की निगाह रखी जा रही है। ताकि कोई चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते हुए चुनाव प्रचार न कर सके। तीनों विधानसभा क्षेत्र में तीन-तीन उड़न दस्ता लगातार गश्त कर रहे हैं।

शराब की ब्रिकी हुई प्रतिबंधित

चुनाव प्रचार समाप्त होने के साथ ही जिले में शराब की बिक्री पर भी रोक लग गई है। 11 फरवरी को शाम पांच बजे तक शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक रहेगी। पुलिस, सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है।
वहीं, चुनाव अधिकारी का कहना है कि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है। किसी भी प्रत्याशी को अब चुनाव प्रचार करने की अनुमति नहीं है। उड़न दस्ता को सक्रिय कर दिया गया है। चुनाव प्रचार करने पर प्रत्याशी के खिलाफ मामला दर्ज होगा। प्रचार वाहन जब्त होंगे। शराब की बिक्री पर भी प्रतिबंध लागू हो गया है।

यूपी में चुनाव के सात चरण

-यूपी में पहले चरण का मतदान 11 फरवरी

-दूसरे चरण में 67 सीटों पर 15 फरवरी को मतदान

-तीसरे चरण में 69 सीटों पर 19 फरवरी को मतदान

-चौथे चरण में 53 सीटों पर 23 फरवरी मतदान

-पांचवें चरण में 52 सीटों पर 27 फरवरी को मतदान

-6वें चरण में 4 मार्च को मतदान

-सातवें और आखिरी फेज में 7 जिलों में 40 सीटों पर 8 मार्च को मतदान होगा

लखनऊ. यूपी में फर्स्ट फेज के लिए 11 फरवरी को 15 जिलों में वोट डाले जाएंगे। चुनाव में कुल 840 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। बीजेपी, सपा-कांग्रेस और बसपा के अलावा रालोद को भी लग रहा है कि चुनाव का ये फेज उनके लिए काफी अहम है। एक्सपर्ट श्रीधर अग्निहोत्री ने  बताया कि चुनाव का ये फेज ऐसा है, जिसमें इन दलों के अपने परंपरागत वोटों के साथ दूसरे दल के वोट बैंक में सेंध लगाने पर भी जोर है। एक्सपर्ट के मुताबिक, बीजेपी को विश्वास है कि वोटों का पोलराइजेशन कर उसे चुनाव में काफी फायदा मिलेगा। इसीलिए हिंदुओं के पलायन, गौकशी और महिलाओं की असुरक्षा को ही पार्टी ने मुद्दा बनाया है।

  • फर्स्ट फेज में 15 जिलों की 73 सीटों पर वोटिंग होनी है। इसमें ज्यादातर सीटों पर सपा-कांग्रेस अलायंस, बीजेपी और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
  • वहीं, करीब 20 से ज्यादा सीटों पर रालोद की मजबूत दावेदारी है।
 इन जिलों में होना है मुकाबला
– फर्स्ट फेज के चुनाव में शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, एटा और कासगंज जिले शामिल हैं।
– इस फेज के चुनाव में कुल 840 कैंडिडेट्स मैदान में हैं। इनमें सबसे कम 6-6 कैंडिडेट मेरठ की हस्तिनापुर, गाजियाबाद की लोनी और अलीगढ़ की इग्लास सीट पर हैं।
– सबसे ज्यादा मुजफ्फरनगर सीट पर हैं, जहां से 16 कैंडिडेट चुनाव मैदान में हैं। वहीं, मेरठ में 15 कैंडिडेट हैं।
जाट, मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का बोलबाला
– इस फेज में होने वाली वोटिंग को अगर जातिगत आधार देखें तो यहां जाट, मुस्लिम और पिछड़ी जातियों का बोलबाला है। इसमें यादव सबसे ज्यादा हैं।
– मथुरा, हाथरस, आगरा और अलीगढ़ जैसे जिलों में जाट निर्णायक स्थिति में है। मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर जैसे जिलों में मुस्लिम, किसी भी कैंडिडेट की किस्मत बदल सकते हैं।
पिछले चुनाव में सपा-बसपा में था कड़ा मुकाबला
– पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था।
– इन 73 सीटों में सपा को 24, बसपा को 23, बीजेपी को 12, रालोद को 9 और कांग्रेस को 5 सीटें मिली थीं।
पहले फेज के चुनाव से बीजेपी को काफी उम्मीदें
– बीजेपी 2014 लोकसभा चुनाव में मिली जीत को दोहराने के मूड में है। पार्टी को विश्वास है कि वोटों का पोलराइजेशन कर उसे चुनाव में काफी फायदा मिलेगा।
– इसीलिए हिंदुओं के पलायन, गौकशी और महिलाओं की असुरक्षा को ही पार्टी ने मुद्दा बनाया है। लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद को छोड़कर बाकी सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। जीती हुई विधानसभा सीटों की संख्या 60 थी।
अजीत सिंह की होगी कड़ी परीक्षा
– चुनाव में अजीत सिंह के रालोद की कड़ी परीक्षा होने वाली है, क्योंकि 2002 के बाद रालोद बिना किसी अलायंस के अपने दम पर चुनाव मैदान में है।
– लोकसभा चुनाव में पूरी तरह से साफ होने के बाद इस बार जाटों की सहानुभूति अजीत सिंह को मिल सकती है।
– जिन 15 जिलों में चुनाव होने हैं, उसमें से 11 जिलों में जाटों की भूमिका काफी अहम है। 2014 लोकसभा चुनाव में जाटों का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी के साथ आ गया था।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s