विधानसभा चुनाव में वोट न डाल पायेंगे सूबे के पांच लाख मतदाता

आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश में पांच लाख मतदाता वोट डालने से वंचित रह सकते हैं। इनमें सबसे ज्यादा डेढ़ लाख लोग कानपुर के होंगे। यह सभी पसोपेश में हैं कि तीन फरवरी को एमएलसी चुनाव में अंगुली पर स्याही लगने के बाद वह विधानसभा चुनाव में कैसे वोट डाल पायेंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा, खंड स्नातक और शिक्षक विधायक का चुनाव एक साथ कराने के अदूरदर्शी फैसले के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। भारत निर्वाचन आयोग ने बीते चार जनवरी को उत्तरप्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी। आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक उत्तरप्रदेश में 11 फरवरी से सात मार्च के बीच सात चरणों में मतदान होगा और ग्यारह मार्च को सभी चरणों की मतगणना एक साथ होगी। इस कार्यक्रम के दो दिन बाद ही आयोग ने प्रदेश में रिक्त पड़ीं तीन खंड स्नातक सीटों (गोरखपुर-फैजाबाद, कानपुर खंड व बरेली-मुरादाबाद) और दो शिक्षक विधायक सीटों (इलाहबाद-झांसी व कानपुर खंड) पर भी चुनाव कराने का ऐलान कर दिया और इनके लिये मतदान 3 फरवरी और मतगणना छह फरवरी को कराने की घोषणा कर दी। एक साथ हुए इन दो आदेशों से इन पांचों खंड क्षेत्रों के करीब पांच लाख ऐसे मतदाताओं पर विधानसभा चुनाव में मतदान से वंचित रहने की तलवार लटकने लगी।

इनमें सवा से डेढ़ लाख वोटर प्रत्येक खंड स्नातक क्षेत्र और 15-20 हजार वोटर प्रत्येक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के हैं। इन सभी के सामने यह संकट पैदा हो गया है कि स्नातक व शिक्षक विधायक के चुनाव में जब तीन फरवरी को वह मतदान करेंगे और उनकी अंगुली पर स्याही लगा दी जायेगी तो चंद रोज बाद ही होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें वोट कैसे डालने दिया जायेगा। जाहिर है अंगुली पर स्याही लगी होने के कारण वह विधानसभा चुनाव में मतदान से वंचित रह जायेंगे। इनमें सबसे ज्यादा मतदाता कानपुर खंड के होंगे। नयी वोटर लिस्ट के मुताबिक महानगर जनपद में स्नातक चुनाव के करीब 1.07 लाख मतदाता, उन्नाव में 11 हजार मतदाता और कानपुर देहात में 13 हजार मतदाता हैं। शिक्षक निर्वाचन की वोटर लिस्ट में करीब 17 हजार मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा वोटिंग को लेकर पसोपेश में पड़े इन मतदाताओं के संबंध में अभी तक कोई आदेश जारी न किये जाने और मतदान का कोई विकल्प न दिये जाने से साफ है कि आयोग विधानसभा चुनाव में संभावित इस समस्या से अब तक अंजान है। एक साथ दो चुनाव कराने के फैसले से विधानसभा चुनाव में शत-प्रतिशत (अधिक से अधिक) मतदान कराने के लिये निर्वाचन आयोग द्वारा किये जा रहे प्रयासों को भी गहरा धक्का लगने की संभावना है। जिलाधिकारी (जिला निर्वाचन अधिकारी) कौशलराज शर्मा ने भी इस समस्या को स्वीकारा, मगर जल्दी ही इसका निदान करने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस संबंध में पत्र भेजकर दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया जायेगा और मतदान से पूर्व ऐसे सभी मतदाताओं को राहत प्रदान की जायेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में किसी भी मतदाता को मतदान से वंचित नहीं रहने दिया जायेगा।

img_5873dc63e7c91

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s