Train accident update :

रेल संरक्षा आयुक्त की प्रारंभिक जांच में सामने आया तथ्य, चालक व सहचालक नजरबंद, किसी से मिलने पर पाबंदी

डॉ.संजीव, कानपुर। दो दिन पहले रविवार तड़के कानपुर में दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस के पहिये जाम होकर टूट गए थे। रेल संरक्षा आयुक्त की अब तक हुई प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है। इस बीच ट्रेन के चालक व सहचालक को नजरबंद कर उनके किसी से मिलने पर पाबंदी लगा दी गयी है।

रविवार तड़के चैन की नींद सो रहे 149 लोगों को मौत की नींद सुला देने वाली इस रेल दुर्घटना ने रेलवे को अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से सोचने के लिए विवश कर दिया है। दुर्घटना की जांच रेलवे की ओर से रेल संरक्षा आयुक्त को सौंपी गयी थी। 48 घंटे की पड़ताल के बाद रेलवे ने कर्मचारियों की लापरवाही व डिब्बों की देखरेख में ढिलाई को घटना की मूल वजह माना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कैरेज एंड वैगन विभाग की चूक सामने आ रही है। अब तक हुई जांच से पता चला है कि ट्रेन के एक डिब्बे का पहिया लगातार ब्रेक ब्लॉक्स से चिपक रहा था। इस कारण पहिया गरम होता रहा और अंततः अत्यधिक गरम होकर टूट गया।

पहिया टूटने के कारण पूरी गाड़ी डिस्बैलेंस हुई और इतना बड़ा हादसा हो गया। बताया गया कि यदि कैरेज व वैगेन विभाग ने गाड़ी रवाना होने से पहले हर डिब्बे की ठीक से चेकिंग की होती तो यह नौबत नहीं आती। इस बीच रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के चालक व सहचालक को नजरबंद कर लिया है। उन्हें किसी से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है। अभी भले ही रेलवे के कुछ अफसरों पर कार्रवाई हुई है, किन्तु जांच रिपोर्ट आने के बाद बड़े अफसरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। रेलवे पुलिस भी इन संभावनाओं पर जांच कर आगे बढ़ रही है। प्रदेश में रेलवे पुलिस के मुखिया गोपाल गुप्ता ने ऐसी किसी संभावनाओं से इनकार न करते हुए 12 सदस्यीय जांच दल गठित किया है। मुकदमे में भी अज्ञात रेलकर्मियों को अभियुक्त बनाया गया है।

एक मरीज एयरलिफ्ट

दुर्घटना में घायल हुए चार सौ से अधिक लोगों में से अधिकांश को छुट्टी दी जा चुकी है। कानपुर देहात के जिला अस्पताल में भी सिर्फ दस लोग बचे हैं, शेष गंभीर मरीजों को कानपुर के लाला लाजपत राय चिकित्सालय में शिफ्ट किया गया है। कानपुर के जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने बताया कि मेडिकल कालेज में इस समय 75 मरीज इलाज करा रहे हैं। इनमें से एक मरीज पूजा को एयर एंबुलेंस से दिल्ली भेजा गया है। मध्य प्रदेश पीएसी के जवान जितेंद्र सिहं को लखनऊ रेफर किया गया है। शेष मरीजों की स्थिति स्थिर है।

इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे की जांच शुरू, चालक सहित अन्य के बयान हुअ दर्ज

कानपुर। पुखरायां में हुए ट्रेन हादसे की जांच मंगलवार से शुरू हो गई। सीआरएस की अध्यक्षता में ट्रेन के चालकों व सुरक्षा से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज किए गए। अगले दो-तीन दिन में जांच पूरी कर सौंपे जाने की अफसरों ने बात कही है।
सेन्ट्रल स्टेशन पर इंदौर-पटना एक्सप्रेस के कानपुर देहात के मलासा स्थित दलेलनगर के पास हादसे का शिकार होने की जांच का पहला दिन चालकों के बयान दर्ज हुए। रेलवे सुरक्षा चेयरमैन पीके आचार्य, एनसीआर के अफसर विजय कुमार आदि ने ट्रेन के चालक जलज शर्मा से हादसे से जुड़े हर पहलुओं की बारिकी से पूछताछ की। चालक ने बड़ी बेबाकी से बयान देते हुए कहा कि अगर वह इमरजेंसी ब्रेक न लगाता तो 14 के बजाए गाड़ी के सभी डिब्बे पटरी से उतर जाते।
इस बात से अफसरों ने नाराजगी भी जताई, लेकिन चालक का कहना है कि तेज आवाज आने पर उसे ऐसा करना पड़ा। वहीं चालक ने बताया कि ट्रेन झांसी स्टेशन छोडऩे के बाद से ही हिलोरे ले रही थी। चालक के बयान लेने के बाद टेक्निशियन से लेकर हादसा स्थल व उससे पीछे के जिन-जिन क्रासिंग व हाल्ट स्टेशनों के फोरमैनों से बयान लिए। वहीं हादसे के दौरान गाड़ी में सवार सुरक्षा बल जीआरपी के पुलिस कर्मियों से भी बयान लिए गए। सीआरएस ने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में जांच रिपोर्ट बनाकर मंत्रालय को सौंप दी जाएगी। फिलहाल कई लोगों के बयान लेने के बाद हादसे का कारणों को अधिकारियों ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जद में आने वाले जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई के साथ बर्खास्तगी तक की जा सकती है।
इन पर गिरी गाज
पुखरायां में इंदौर-पटना (राजेन्द्र नगर टर्मिनल) एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। भीमसेन जीआरपी के इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह की तहरीर पर जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। इंस्पेक्टर ने दुर्घटना के लिए अज्ञात रेलवे कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। जिसके बाद रेलवे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीआरएम झांसी को हटा दिया है। सीनियर डिवीजनल मैकेनिकल, इंजीनियर नावेद तालिब, डिवीजनल, इंजीनियर लाइन मनोज मिश्रा निलंबित किए गए। वहीं डीआरएम झांसी वीके अग्रवाल का तबादला रांची कर दिया गया।
इंस्पेक्टर वादी बन दर्ज कराई एफआईआर
प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पाण्डा घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने निरीक्षण करने के साथ ही साफ तौर पर कहा था कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। प्रमुख सचिव के इस बयान के बाद ही भीमसेन जीआरपी इंस्पेक्टर को एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए। इंस्पेक्टर ने खुद वादी बनकर अज्ञात रेल कर्मियों के खिलाफ धारा 304ए (लापरवाही से मौत) हो जाने की धारा में एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने ट्वीट करके सभी को जानकारी दी। इस मामले में एसपी रेलवे झांसी सत्येन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि इस एफआईआर की अलग से की
जाएगी। रेलवे की जांच से कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जीआरपी विवेचना करेगी और जांच में लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसे विवेचना में शामिल किया जाएगा। उसी आधार पर
गिरफ्तारी भी होगी।
73 करोड़ का पड़ा अधिभार
कानपुर-झांसी रेलखंड के बीच स्थित पुखरायां रेलवे स्टेशन के समीप हादसे से रेलवे पर कोई 73 करोड़ रुपए से अधिक का अधिभार पड़ा है। इस राशि में घंटों फंसे रहे 18 सौ अधिक रेल यात्रियों और विभागीय अमले के मानव घंटों के नुकसान का आकलन न्यूनतम मजदूरी से कर लिया जाए तो नुकसान राशि एक अरब रुपए से अधिक पार हो जाएगी। रेलवे के आकलन के मुताबिक इस राशि में अभी वह क्लेम धन नहीं जुड़़ा है जो बाद में दावा पेश होते हैं। ये सभी दावे रेलवे ट्रिब्यूनल क्लेम (आरटीसी) में दाखिल किए जाते हैं। इसके फैसले पर रेलवे को मुआवजा चुकाना होता है।


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