कानपुर हॉस्पिटल में लड़के की मौत पर अधिकारी निलंबित

हैलट कांड के बाद हरकत में आये प्रशासन ने अब जिले की चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिये कमर कस ली है। जिलाधिकारी ने गुरुवार को डाक्टरों की मैराथन बैठक कर उनके पेंच कसे और सुधरने की चेतावनी दी। यह भी कहा कि आगामी मंगलवार से सीएचसी व पीएचसी पर छापेमारी की जायेगी। जो भी डाक्टर या कर्मचारी अनुपस्थित मिले, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने सीएचसी में तैनात डाक्टरों और उनके प्रतिनिधियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सीएचसी समय से पहले बंद कर दिये जाते हैं। कई तो खुलते ही नहीं हैं, जो खुलते भी हैं तो उनमें डाक्टर नहीं मिलते। अब यह धांधली नहीं चलेगी। सभी डाक्टर व चिकित्सा कर्मी सुधार कर लें, वरना कड़ी कार्रवाई की जायेगी। मंगलवार से विशेष टीमें बनाकर सीएचसी और पीएचसी में छापेमारी की जायेगी। जो डाक्टर व कर्मचारी नहीं मिले उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिये शासन को लिखा जायेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी सीएचसी के पास कम से कम दो लाख रुपये हैं। बजट की कमी नहीं है। इन रुपयों से दवायें, स्प्रे, मशीन आदि तत्काल खरीद लें। सीएचसी की साफ-सफाई भी सुनिश्चित की जाये। जो भी मरीज डेंगू, मलेरिया आदि से संबंधित आता है उसका पूरा ब्योरा दर्ज करें। चेकअप और प्राथमिक उपचार के बाद ही उसे रेफर करें। हर ब्लाक में चार दिन कैम्प लगवाना सुनिश्चित करें। सितम्बर का महीना इन्फेक्शन का होता है। मरीजों से संवाद करें, उन्हें संतुष्टि प्रदान करें। उन्होंने कहा कि डेंगू के मरीजों के आंकड़े माइक्रोलॉजी विभाग सीएमओ के माध्यम से शासन को भेजेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को कैम्प लगाये जायें। उसका ब्योरा भी उपलब्ध कराया जाये। शासन द्वारा कायाकल्प योजना चलायी जा रही है, जिसमें स्वास्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके लिये पैरामीटर्स होंगे, आपरेशन, डिलिवरी, साफ-सफाई आदि पर अंक प्रदान किये जायेंगे। हर जिले में दो सीएचसी व एक पीएचसी को चुना जायेगा और पुरस्कार दिया जायेगा। बैठक में सीएमओ डा. रामायण प्रसाद यादव, एसीएमओ डा.अरुण कुमार श्रीवास्तव, डफरिन अस्पताल की अधीक्षिका डा.नीता चौधरी के अलावा उर्सला, केपीएम, कांशीराम अस्पताल के सीएमएस और सीएचसी-पीएचसी के डाक्टर व उनके प्रतिनिधि मौजूद थे।
हैलट अस्पताल में उपचार के अभाव में बच्चे की मौत के बहुचर्चित मामले की जांच में इमरजेंसी के डय़ूटी डाक्टर समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया गया है। जिलाधिकारी ने गुरुवार को जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी, जिसमें इन सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गयी है। वार्ड ब्वाय और गार्ड को तो नौकरी से बर्खास्त करने और भविष्य में किसी सरकारी अस्पताल में नौकरी करने पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गयी है। जिलाधिकारी ने हैलट व संबद्ध अस्पतालों में व्यवस्था दुरुस्त करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये कुछ सुझाव भी दिये हैं। मरियमपुर अस्पताल के पास रहनेवाले सुनील कुमार के पुत्र 10 वर्षीय पुत्र अंश की बीते शुक्रवार को हैलट अस्पताल में उपचार न किये जाने पर मौत हो गयी थी। वह कई दिन से बुखार से पीड़ित था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे लेकर हैलट अस्पताल पहुंचे तो इमरजेंसी में उपचार नहीं किया गया और उसे बाल रोग अस्पताल ले जाने को कह दिया गया। वहां ले जाने के लिये स्ट्रेचर न मिला तो सुनील कुमार बेटे को कंधे पर लेकर दौड़ता हुआ बाल रोग अस्पताल पहुंचा, जहां डाक्टरों ने अंश को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने अंश की मौत के लिये हैलट प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था। मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री ने हैलट अस्पताल के सीएमएस को निलंबित कर दिया था। साथ ही जिलाधिकारी को आदेश दिये थे कि वह तीन दिन में मामले की गहन जांच कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति के साथ रिपोर्ट भेजें।

जिलाधिकारी ने जांच के लिये एसीएम 6 की आरपी त्रिपाठी कर अगुवाई में टीम गठित की थी, जिसमें अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एके श्रीवास्तव को बतौर सदस्य नामित किया था। टीम ने तीन दिन में गहन जांच-पड़ताल की। इस दौरान हैलट के कई डाक्टरों, नर्सिग स्टाफ, वार्ड ब्वाय व कई अन्य कर्मियों से पूछताछ की और मृतक के परिजनों के बयान भी लिये। टीम ने गुरुवार सुबह अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को सौंप दी, जो उन्होंने अध्ययन करने के बाद अपनी संस्तुतियों व सुझावों के साथ शासन (प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा) को भेज दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना के दौरान इमरजेंसी में तैनात जन संपर्क अधिकारी पल्लवी शुक्ला द्वारा दायित्वों के निर्वहन में पूर्ण शिथिलता बरती गयी। उनका कार्य मरीजों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उसे सही डाक्टर के पास भेजना होता है, मगर पल्लवी शुक्ला ने ऐसा नहीं किया, लिहाजा उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई और दंडित किये जाने की संस्तुति की गयी। बकौल एसीएम, घटना के समय इमरजेंसी में तैनात वार्ड ब्वाय संतोष कुमार पुत्र स्व.रामप्रसाद सचान की शिथिलता की भी पुष्टि हुई। इन्हें मरीज को स्ट्रेचर उपलब्ध न कराने का दोषी पाया गया और सर्विस प्रदाता के माध्यम से इनकी सेवाएं समाप्त कराने की संस्तुति की गयी। यह भी कहा गया कि इन्हें कभी भी स्वास्य विभाग से संबंधित किसी भी अस्पताल में इस प्रकार की सेवाओं के लिये न रखा जाये। एक अन्य वार्ड ब्वाय शिव सहाय तिवारी घटना के समय इमरजेंसी में डय़ूटी पर होने चाहिये थे, परन्तु वह डय़ूटी पर नहीं थे। इसलिये इनसे स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिये तथा भविष्य में ऐसी गैर जिम्मेदारी न हो इसके लिये कठोर चेतावनी दी जानी चाहिये।

जांच में इमरजेंसी विभाग में तैनात गार्ड संदीप कुमार को भी संवेदनहीनता का दोषी पाया गया और सर्विस प्रदाता के माध्यम से इनकी सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति की गयी। यह भी सिफारिश की गयी कि इन्हें कभी भी स्वास्य विभाग से संबंधित किसी भी अस्पताल में इस प्रकार की सेवाओं के लिये न रखा जाये। रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने तथा वार्ड ब्वाय/स्वीपर उपलब्ध कराने हेतु दो अलग-अलग सेवा प्रदाता नामित हैं। इन दोनों सेवा प्रदाताओं पर अनुबंध की शतरे में यदि पेनाल्टी का प्रावधान है तो पेनाल्टी लगायी जाये तथा उनको कठोर चेतावनी दी जाये कि भविष्य में यदि इनके कर्मचारियों द्वारा इस प्रकार की संवेदनहीनता बरती गयी तो न केवल इनका अनुबंध समाप्त कर दिया जायेगा, बल्कि इनके विरुद्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्यवाही भी की जायेगी। आपराधिक धाराओं में कार्रवाई भी की जा सकती है। इन दोनों सेवा प्रदाताओं को यह भी निर्देश दिये जायें कि वह अपने कर्मचारियों की कार्यपण्राली के निरीक्षण हेतु अपने स्तर पर सुपरवाइजर कर्मचारी की तैनाती करें जो अस्पताल में रहकर उनकी उपस्थिति एवं कार्यपण्राली चेक करे। जांच में इस घटना के लिये इमरजेंसी विभाग में चिकित्साधिकारी के रूप में डय़ूटी दे रहे डा.मयंक सिंह को भी दोषी माना गया। रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़ित बेटे को लेकर जब उसके पिता इमरजेंसी में पहुंचे तो डा.मयंक को इमरजेंसी में ही उसकी प्राथमिक चिकित्सा करनी चाहिये थी तथा वहां पर डय़ूटीरत अन्य चिकित्सकों को मरीज के स्टेबिल होने तक इलाज करने हेतु निर्देशित करना चाहिये था। बयान में डाक्टर मयंक ने कहा कि वार्ड ब्वाय द्वारा मरीज को बाल रोग इमरजेंसी भेजने की उन्हें जानकारी नहीं है। चूंकि यह घटनाक्रम उनके कार्यालय के बिल्कुल सामने का है, इसलिये डय़ूटी सजगता से न करने का दोषी मानकर डा.मयंक सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गयी।

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