मौसम की आंख मिचौली से 1500 करोड़ फंसे,जितनी सर्दी की उम्मीद थी उतनी नहीं पड़ी जिससे गर्म कपड़ों के बाजार में रौनक नहीं रही।

दिवाली के दौरान ठंड के तेवर देखते हुए लग रहा था कि इस बार रिकार्ड तोड़ सर्दी पड़ेगी। इसी आस में व्यापारियों ने गर्म कपड़ों के थोक में आर्डर दे डाले और माल शोरूम में भर लिया। अब ऊनी कपड़ों के थोक और फुटकर व्यापारी खून के आंसू रो रहे हैं। दिसम्बर में पसीने छुड़ाने वाली सर्दी ने बाजार को पस्त कर दिया है। एक तरफ फुटकर दुकानों में एक हजार करोड़ रुपए का माल फंसा है तो थोक कारोबारियों के गोदाम भी 1500 करोड़ के माल से भरे हुए हैं। यही हाल इलेक्ट्रिकल कारोबारियों का है। छह जनवरी को हाफ स्वेटर की सर्दी व्यापारियों को रुला रही है। इस साल लुधियाना और अमृतसर से ऊनी कपड़ों की गांठों की डिलीवरी रुक गई है। कोपरगंज, कलक्टरगंज से लेकर फूलवाली गली और कर्नलगंज तक के व्यापारी बेहाल हैं। रजबी रोड स्थित मोहम्मद कलीम ने बताया कि व्यापारियों का स्टाक रुका हुआ है। कैश फ्लो रुक गया। जो माल उधार बेचे गए हैं, उसकी वापसी न के बराबर हो गई है। फुटकर व्यपारियों का माल बिक नहीं रहा है, इसलिए आगे गर्मी के आर्डर नहीं बुक हो पा रहे हैं। कुल मिलाकर छोटे व्यापारी तो तबाह हो गए हैं। कोपरगंज के थोक कारोबारी अमित शाह ने बताया कि सर्दी ने गर्मी का काम भी अटका दिया है। बाजार का पूरा गणित ही धराशायी हो गया है। इसे पटरी में लाना बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि सभी का पैसा ब्लॉक हो गया है। अब तो औने-पौने भाव में निकालने की मजबूरी आ गई है। गर्मी के तेवर देखते हुए 25 दिसम्बर से ही सेल शुरू हो गई है। ब्रांडेंड कंपनियां 50 से 70 प्रतिशत तक के डिस्काउंट दे रही हैं, फिर भी ग्राहक नहीं आ रहे हैं। दो हजार रुपए वाले स्वेटर और जैकेट 400 से 600 रुपए में बेचे जा रहे हैं। एक मल्टीनेशनल कंपनी के डीलर हिमांशु त्रिवेदी ने बताया कि सात दिन में एक करोड़ रुपए का माल 35 लाख में बेचने का आफर दिया, फिर भी नहीं बिका। 15 जनवरी से सहालगें शुरु हो रही हैं, इसलिए नया माल रखना मजबूरी है। बैंक से लोन लेकर नया स्टाक रखने की तैयारी में हैं। ऐसा नहीं किया तो सड़क पर आ जाएंगे।
दिवाली के बाद शुरुआत में ठंड बढ़ने के साथ ड्राइफ्रूट का कारोबार गर्म हुआ था लेकिन दिसम्बर आते-आते धड़ाम हो गया। पिछले साल की तुलना में कुछ मेवों के दाम गिर गए जबकि ठंड बढ़ने के साथ इसके दामों में तेजी आती थी। नयागंज के ड्राइफ्रूट कारोबारियों की मानी जाए तो आगे भी दाम बढ़ने की कोई सम्भावना नहीं है। पिछली बार की तुलना में ड्राइफ्रूट के दामों में तीस प्रतिशत तक गिरावट है। ठंड में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाली बादाम गिरी के दाम 60 रुपए किलो तक कम हो गए। इससे बुरा हाल चिलगोजे का है। पिछले साल 1800 रुपए किलो बिकने वाला चिलगोजा आज 13 सौ रुपए किलो बिक रहा है।60 रुपए प्रति किलो गिर गए बादाम गिरी के दाम, कम सर्दी की वजह से
यही हाल हीटर, ब्लोअर, गीजर बाजार आदि का है। मनीराम बगिया के छोटे-बड़े शोरूमों में सन्नाटा पसरा है। दिलचस्प बात तो यह कि सर्दी वाले उत्पादों से ज्यादा बिक्री पंखों और एयरकंडीशनों की है। कानपुर इलेक्ट्रिकल एंड कांट्रेक्टर मर्चेन्ट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव प्रवीण आनंद ने बताया कि कारोबारियों की स्थिति नाजुक है। शुरुआत में सर्दी के तेवर देख खासा माल भर लिया था लेकिन बिक्री आधी भी नहीं हुई है। माल डंप हो गया है।

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