मोबाइल लाइट छीन रही बच्चों की रातों की नींद

कानपुर:-कुछ बच्चे आपके हाथों से मोबाइल छीनकर गेम खेलने लगते हैं तो कुछ रात में टीवी के सामने आराम से मोबाइल की स्क्रीन पर घोड़े दौड़ाते हैं और हम चर्चा भी करते हैं कि आजकल बच्चों का दिमाग तो इलेक्ट्रॉनिक हो गया है। मोबाइल के बारे में जितनी उन्हें जानकारी है उतनी तो मुङो जिंदगी भर नहीं होगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि आपकी यह खुशी बच्चों की जिदंगी पर भारी पड़ने वाली है। ऐसे में आपको होशियार होने की जरूरत है क्योंकि मोबाइल स्क्रीन की ‘लक्स लाइट’ बच्चों की आंखों से मीठी नींद उड़ा रही है। डॉक्टरों के सामने शोध में इन तथ्यों का खुलासा हुआ है। 7-19 वर्ष के बच्चे और किशोरों को नींद की समस्या है।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के कॉलेज आफ जनरल प्रैक्टिशनर (सीजीपी) में दूसरे दिन नींद पर चर्चा हुई। गुड़गांव आर्टिमिस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु गर्ग ने कहा कि नींद पर अब घरों में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुम्बई और कानपुर जैसे महानगरों में स्थिति बेहद खतरनाक है। 65-70 प्रतिशत वयस्कों में नींद की समस्या है जबकि बच्चों में यह प्रतिशत तेजी से बढ़ा है इसकी वजह इलेक्ट्रानिक गैजेट्स का बढ़ता इस्तेमाल है। डॉ. गर्ग के मुताबिक नींद माइंड गेम है। इसका एक रिदम है। बिल्कुल आरकेस्ट्रा जैसा। टीवी, कम्प्यूटर, मोबाइल स्क्रीन इस रिदम को तोड़ देते हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से निकलने वाली लाइट अगर बच्चों की आंखों पर पांच मिनट भी रात में पड़ जाए तो नींद डिस्टर्ब हो जाएगी।

 

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